मात्राभार गणना ( विस्तृत ) ********************* मात्रा आधारित छंदमय रचनायें लिखने के लिए मात्रा या मात्राभार की गणना का ज्ञान होना अति आवश्यक है ,,,,आओ इस ज्ञान- विज्ञान को जाने — नोट —-१ मात्रा या मात्राभार को = लघु ,,,,(इसके उच्चारण में / बोलने में ,कम /अल्प समय लगता है) २ मात्रा या मात्राभार को = गुरु कहते हैं ,, ,(इसके उच्चारण में / बोलने में ,अपेक्षाकृत ज्यादा/अधिक समय लगता है) **(१)*** हिंदी में ह्रस्व स्वरों (अ, इ, उ, ऋ) की मात्रा १ होती है जिसे हम लघु कहते हैं **(२)*** हिंदी में दीर्घ स्वरों (आ, ई, ऊ, ए,ऐ,ओ,औ,अं, ) का मात्राभार २ होता है ,, जिसे हम गुरु कहते हैं. **(३)*** हिंदी में प्रत्येक व्यंजन की मात्रा १ होती है,,,, जो नीचे दर्शाये गए हैं — – *** क,ख,ग,घ , *** च,छ,ज,झ,ञ , *** ट,ठ,ड,ढ,ण , *** त,थ,द,ध,न , *** प,फ,ब,भ,म , ***य,र,ल,व,श,ष,स,ह जैसे—- अब=११, कल=११,, करतल =११११ ,,पवन १११ ,,मन =११ ,,चमचम=११११ ,,जल =११,,हलचल ११११,,दर =११,,कसक=१११,,दमकल =११११ ,,छनक =१११ ,दमक =१११ ,उलझन =११११ ,, बड़बड़ =११११,, गमन=१११ , नरक=१११ ,, सड़क=१११ **(४)*** किसी भी व्यंजन में इ , उ ,ऋ की मा...