73.माहिया( प्यार कभी खोने में)

प्यार कभी खोने में
तेरे जानें पर  
घर के एक कोने में 

बिस्तर पर तकिए पर
आंख न भीगे जब
एक चश्में रखिए पर

जानें क्या चहरे पर
ओढ़े चुनरी क्यों
घूंघट है पहरें पर

देख तमाशा मौन हु 
आशिक था पहले
अब जाने मै कौन हु

सोच समझ बात करूं
कवि की कविता से
दिल पर क्यों घात करूं

©️Suraj Tiwari

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