103,दोहा



1.जिम्मेदारी में फसा,करता मानव काज

  जीवन यह अनमोल है,बिकते तख्तों ताज


2.बरसाने की छोरियां , करती भाव विभोर  ।

 कान्हा कैसे जी रहा ,ये ना सोचे और ।।


Suraj Tiwari

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