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Showing posts from April, 2025

52.काव्य दोष 3

 5- दुष्क्रमत्व दोष जब कोई ऐसी बात कही जाती है जो लोक या शास्त्र के विरुद्ध हो तो दुष्क्रमत्व दोष होता है। उदाहरण -  मुख मयंक को देखकर विकसा मानस कंज। कमल चंद्रमा को देखकर तो खिलता नहीं है इसलिए ये दोष है होना चाहिए था सूरज का मुख देखकर विकसा मानस कंज ये बात लोक विरुद्ध ही है न कि चंद्रमा को देखकर कमल खिला हां कुमुदिनी की बात होती तो सही था कुमुदिनी के पर्याय नलिनी, कैरव, चंद्रप्रिया, कमलिनी, छोटा कमल, अरविंदिनी, मृणालिनी, तामरसी, विधुप्रिया, तमरसी ये भी कुमुदिनी के पर्याय क्योंकि कुमुदिनी रात्रि में खिलती। 6- अपुष्टार्थत्व दोष:: जहाँ किसी ऐसी वस्तु का वर्णन हो जिसके न होने पर भी इच्छित अर्थ की प्राप्ति में बाधा न हो, तो पुष्टार्थत्व दोष होता है। उदाहरण -  आये वैरी विपुल चढ़ के अब उठो सैनिकों तुम। वैरी विपुल न भी हों तब भी सैनिकों को उनका सामना करने को उठना ही होगा।यहाँ विपुल का प्रयोग अनावश्यक है। 7- व्रीडावाची दोष.... लज्जा या संकोच का भाव जगाने वाले शब्दों को व्रीडावाची शब्द कहते हैं। उदाहरण -  घटाएं पुरानी  मौन, बैठा सोचता हूँ उस समय कितना बड़ा मैं चूतिया था। ...

51.काव्य दोष 2

 5- दुष्क्रमत्व दोष जब कोई ऐसी बात कही जाती है जो लोक या शास्त्र के विरुद्ध हो तो दुष्क्रमत्व दोष होता है। उदाहरण -  मुख मयंक को देखकर विकसा मानस कंज। कमल चंद्रमा को देखकर तो खिलता नहीं है इसलिए ये दोष है होना चाहिए था सूरज का मुख देखकर विकसा मानस कंज ये बात लोक विरुद्ध ही है न कि चंद्रमा को देखकर कमल खिला हां कुमुदिनी की बात होती तो सही था कुमुदिनी के पर्याय नलिनी, कैरव, चंद्रप्रिया, कमलिनी, छोटा कमल, अरविंदिनी, मृणालिनी, तामरसी, विधुप्रिया, तमरसी ये भी कुमुदिनी के पर्याय क्योंकि कुमुदिनी रात्रि में खिलती। 6- अपुष्टार्थत्व दोष:: जहाँ किसी ऐसी वस्तु का वर्णन हो जिसके न होने पर भी इच्छित अर्थ की प्राप्ति में बाधा न हो, तो पुष्टार्थत्व दोष होता है। उदाहरण -  आये वैरी विपुल चढ़ के अब उठो सैनिकों तुम। वैरी विपुल न भी हों तब भी सैनिकों को उनका सामना करने को उठना ही होगा।यहाँ विपुल का प्रयोग अनावश्यक है। 7- व्रीडावाची दोष.... लज्जा या संकोच का भाव जगाने वाले शब्दों को व्रीडावाची शब्द कहते हैं। उदाहरण -  घटाएं पुरानी  मौन, बैठा सोचता हूँ उस समय कितना बड़ा मैं चूतिया था। ...

50.काव्य दोष

 काव्य दोष-- 1.श्रुतिकटुत्व दोष....जो शब्द कठोर वर्णों से बने होते हैं, सुनने में कटु लगते हैं।इनके प्रयोग से रचना में श्रुतिकटुत्व दोष होता है।जैसे--- देखत कछु कौतुक इतै,देखी नेकु विचारी। कब की इकटक डटि रही,टटिया अँगुरिन डारि।।                    बिहारी स्पष्ट है कठोर वर्णों के प्रयोग से ये दोष उतपन्न होता।उदाहरण से स्पष्ट हुआ????? जिसमें ट वर्ग के वर्णों का अधिक प्रयोग हो। 2.व्याकरण दोष...जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों के विरुद्ध प्रयुक्त होता है।जैसे-- मरम बचन जब सीता बोला। यहाँ सीता के साथ पुल्लिंग क्रिया का प्रयोग है। 2.व्याकरण दोष...जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों के विरुद्ध प्रयुक्त होता है।जैसे-- मरम बचन जब सीता बोला। यहाँ सीता के साथ पुल्लिंग क्रिया का प्रयोग है। 3.अश्लीलत्व जिस शब्द से अश्लीलता या फूहड़ता प्रकट हो उसके प्रयोग से यह दोष होता है।जैसे--- चोरत है पर उक्ति को जो कवि ह्वै स्वच्छन्द, वे उत्सर्गरु वमन को, उपभोगत मतिमन्द। जो कवि दूसरों की कविता को स्वछंद होकर चुराता है वो मूर्ख त्यागी हुई की हुई उल्टी का उपभोग करता है।...

49. सवैया छंद 2

 अब विषय पर आते सवैया छंद यह एक वर्णिक छंद है। सवैया गणों पर आधारित होता है।इसमें चार चरण होते हैं। इसमें वर्णिक वृत्तों में 22 से 26 अक्षर के चरण होते हैं।सवैया छंद में चारों चरणों में सम तुकांतता होती है। गणों के विषय में आप पूर्व कक्षा में पढ़ चुके हैं।सवैया छंद के अनेक भेद हैं। * मत्तगयंद सवैया*       मत्तगयंद सवैया--भगण की सात आवृत्ति +गुरु+गुरु अर्थात्..211 211 211 211 211 211 211 22. कुल वर्ण - 23 उदाहरण:- नाथ खड़ा कब से अब तो कर दो कुछ नाम सुनाम हमारे, ये सच है बनते रहते बिन साधन के सब काम हमारे। जीवन का हरते सब कष्ट कृपा करते  सुखधाम हमारे। दीन दयाल, दयानिधि ये सुख कारक हैं  प्रभु राम हमारे। ये इसका विधान है। भागण सात मिला गुरु दो रच दो तुम मात्रगायंड मत्तगयंद सवैया।                                      मनोज शुक्ल"मनुज"

48. तुकांत्ता

 तुकांत ये शब्द सुना  ही है।कौन तुक सही कौन गलत ये समझना आसान नहीं होता है।कविता लिखने के लिए इसे समझना बहुत ज़रूरी है।तुकांतता को वर्गों में बांटकर आपको समझाना चाहता हूँ।आप कहीं कहीं संवर्गीय उच्चारण से भी तुकांत मिला सकते हैं। तुक मिलाने के लिए चरणों के अंतिम वर्ण की समानता आवश्यक होती है। एक बात और ध्यान देने योग्य है कि यहां में ग़ज़ल के काफिया की बात नहीं कर रहा।हिंदी कविता के तुकांत की चर्चा है। काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ, सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत।। परिहार मतलब दोष मुक्त बहुत विशेष बात नोट करें। तुलसी बाबा के इस दोहे में गलत तुकांत का प्रयोग किया गया है। क्योंकि वह पंथ और संत में अंतिम वर्ण समान नहीं है। यही बात समझना जरूरी कि अंतिम वर्ण अनिवार्य रूप से समान हो तुकांत को आप तीन वर्गों में बांट सकते यद्यपि ये तीनों सही हैं। उत्तम तुकांतता मध्यम तुकांतता  और अधम तुकांतता। अधम से सब बचना चाहते आप भी कोशिश करो बचने की आप भी कोशिश करो बचने की बहुत विशेष बात नोट करें। (यदि चरण के अंत में दो गुरु हों तो 5 मात्राएँ एक स्वर की होने पर तुक उत्तम होगा) जैस...

47.पद किसे कहते है

 पद क्या होता है? पद क्या होता : किसी भी छान्दसिक रचना की एक पंक्ति को पद कहते हैं। यानी रचना में जितनी पंक्तियां होंगी उतने ही पद होंगे। जैसे दोहे में दो पद और चार चरण उदाहरण से समझ जायेगे दूध पिलाना साँप को और बुलाना काल, बात "मनुज" हैं एक सी समझो ये तत्काल। इसमें दो पंक्तियाँ इसका अर्थ ये हुआ दोहे में दो पद होते। एक पद में एक चरण या अधिक चरण भी हो सकते जैसे दोहे में चार चरण हैं पहला दूध पिलाना साँप को, दूसरा  और बुलाना काल, तीसरा बात "मनुज" हैं एक सी,  चौथा समझो ये तत्काल। उदाहरण नं 2 अधरों पर है बाँसुरी, मोर मुकुट है शीश। निरख राधिके को रहे, श्याम द्वारकाधीश।। 13/11 दोहा चार चरण दो पद जीवन की नैया, आप खिवैया, दूर न मुझसे, अब जाना। तुमको समझाना, यही बताना,तुम ही पूजा ,भगवाना। सब अच्छा ही है, सुंदर भी है , जो कुछ मन में, है ठाना। तुमसे ही सुख है, डरता दुख है, यह सच हमने ,अनुमाना।                                               मनोज शुक्ल"...

46 सवैया छंद

 सवैया छंद ~~~~~~~~~~~~ मात्रा भार  ~~~~~~~~~~~~ मात्रा भार के बारे में आप सभी को ज्ञात ही है  लघु वर्ण 1 गुरु वर्ण 2 मित्रो वर्ण और अक्षर में क्या अंतर है? अक्षर वह है जिसका क्षरण न हो सके।  स्वर से मिल कर ही कोई अक्षर वर्ण बनता है क् +अ = क भार १ क् + आ= आ भार २ इसलिए जब किसी वर्ण के नीचे हलंत लगा होता है तो उसका भार आधा ही माना जाता है। कमल १११ कमला ११२ कमाल १२१ कामिल २११ कामिनी २१२ अर्थात  अ इ उ ऋ ये लघु स्वर हैं और इनसे संयुक्त वर्णों का भार भी १ होता है आ ई ऊ ए ऐ ओ औ ये दीर्घ अर्थात गुरु वर्ण हैं और इनसे संयुक्त वर्णों का भार २ होता है लेकिन ए और ओ कभी कभी उच्चारण के आधार पर अपवाद स्वरूप १ पर  भी लिये जाते हैं लेकिन स्थानीय बोलियों में ही  जैसे -नाथ शंभु धनु भंजनि हारा होइहि कोउ एक दास तुम्हारा २११   ११   ११   ११  १२२ लेकिन खड़ी की रचनाओं बोली में इससे बचियेगा अब बात हलंत वाले अक्षरों की अर्थात आधे वर्ण की यह अगर किसी शब्द में सब से पहले होता है तो इसका कोई भार नहीं होता।  जैसे- प्यार २१ श्वेत २१ श्वान २१ स...