91.गीत विधा
गीत के मुख्यतः दो भाग होते हैं---
मुखड़ा और अंतरा:---
मुखड़ा--
इसमें सामान्यत: 1 से 4 तक पंक्तियाँ होती हैं,कोई तय संख्या नहीं है।
ये किसी भी छन्द या बहर की मापनी पर हो सकती हैं,किन्तु ऐसा आवश्यक नहीं है। लय बद्धता आवश्यक होने के कारण किसी न किसी छंद में ही होती हैं। मुखड़े की पंक्तियों की लय (मात्रा भार)अन्तरे की पंक्तियों के समान या अलग भी हो सकता है। मुखडे़ की अंतिम पँक्ति को टेक कहते हैं।
अन्तरा/बन्ध---
गीत में कम से कम दो अन्तरे या बंध होते हैं। अधिक की कोई सीमा नहीं है।
इनमें सामान्यतया 3 से 7 तक पंक्तियां होती हैं।अंतिम पंक्ति मुखड़े की टेक वाली पंक्ति से मिलती है। शेष भिन्न होती हैं।
पूरक पंक्ति--टेक वाली पंक्ति
विशेष----एक मुखड़े या अन्तरे में लय या विषय जो निर्धारित हो जाता है। उसका पालन हर अन्तरे व अन्तरे की टेक से मिलने वाली पंक्ति में करना होता है।
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