72.माहिया (जीवन में सपने हो)
जीवन में सपने हो
रब की रहमत हो
दोस्त सब अपने हो
जीवन में ऐसा हो
पैसा कम ही हो
घर मंदिर जैसा हो
लोग मिलें कैसा हो
खुद पर खर्चा हो
चाय बनें चर्चा हो
जो दर दर भटका हो
पैसों के वास्ते
पंखे से जो लटका हो
हां जीवन में गम हो
प्रभु से विनती है
बातों में कुछ दम हो
प्रभु से प्रार्थना हो
बस लालच ना हो
खुशहाल कमाना हो
©️Suraj Tiwari
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