71.(माहिया )जीवन में धूम रहें
जीवन में धूम रहें
प्रभु अब तो वर वधु
माथे को चूम रहें
पंडित सब जान रहे
दुल्हन व दूल्हा
क्यों रिश्ता मान रहें
हाथों में हाथ रहें
मंडप में प्रेमी
सब सोचे साथ रहें
प्रेम विरह रीत रहें
उर में राधे के
मीरा का गीत रहें
प्रेम विरह नाप रहें
मोहन विनती है
अब पश्चाताप रहें
Suraj Tiwari
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