74.माहिया(प्रेम कथा में मीरा)
प्रेम कथा में जलती
राधा प्रतिक्षा में
जीवन के दुख सहती
कविता में हम गाते
नाम कमाते है
प्रेम विरह सह पाते
दृश्य अभी जब देखा
प्रेम विरह में मैं
आम विरह की रेखा
देख सजी डोली को
मन को चैन नहीं
कोश रहा माली वो
अंतर मन में पीड़ा
कैसे कह पाऊं
कवि हूं सहता पीडा
©️Suraj Tiwari
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