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ग़ज़ल

 ग़ज़ल कोई बला न करे ख़ुशियों से जुदा उसको मेरी दुआ है सलामत रखे ख़ुदा उसको   जरा सी बात पे वो तंज कस रहा झूठे, मुझे  पता है कि रुतबा मेरा खला उसको सनम कसम खा तू देगा नहीं कभी धोखा इसी के साथ जो वादा किया निभा उसको तेरे ही नक्शे कदम पर खुदा चलें कैसे मेरे जो थे बिछड़ गए मेलें में मिला उसको सूरज तिवारी