89.शंकर का डमरू बजता कहता सवैया 211*5+222+122+22

मोद सवैया 
211*5+222+122+22

शंकर का डमरू बजता कहता अब भोलेनाथ जहां में

है हमको यह ज्ञात नहीं मिलते कब भोलेनाथ जहां में

हूं करता अब वंदन मै न मिले तब भोलेनाथ जहां में

ले अवतार धरा पर पाप बढ़े जब भोलेनाथ जहां में

Suraj Tiwari

Comments

Popular posts from this blog

जिंदगी की सियासत

ग़ज़ल

ग़ज़ल