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Showing posts from May, 2025

57.किरीट सवैया (पूछ रहे जन से हम)

 समीक्षार्थ  किरीट सवैया 211*8 पूछ रहे जन से हम है धन क्यों फिर इनकार करें अब जीवन में कुछ लोग कमा कर के घर का उपकार करें कब मालिक देख बिछाकर आंचल मांग रहा जिसके हम है सब है अब से कहना जग में न निराश हमें रहना दर पे रब Suraj Tiwari

56.किरीट सवैया 211*8(ध्यान रहे गर कृष्ण )

किरीट सवैया 211*8 ध्यान रहे गर कृष्ण जुदा जब हों तुम युद्ध न जीत सके कब देख दुर्योधन शर्त यही पहले जगा कर कृष्ण जगे तब कृष्ण गए यदि कौरव संग न धर्म बचे सच ही कहते सब केशव है विनती तुम न्याय करों लड़ना किस ध्वज तले अब Suraj Tiwari 

55.किरीट सवैया 211*8 (गाव बसे उर में अब )

गांव बसे उर में अब छोड़ नहीं सकते तुमको प्रिय लाकर। हाथ छुड़ा कर जा सकती अब ध्यान करो कसमें वह खा कर। जी न लगे परदेश कही हम जी न सके निज गांव भुलाकर। प्यार भरा अब जीवन है सब कष्ट मिटा तुम को अब पाकर। Suraj Tiwari

54.किरीट सवैया 211*8(यार करे सब साथ मुझे)

किरीट सवैया 211*8 यार करें सब साथ मुझे एक बार कहों यह बात सखा तुम सूरज साथ बिता पल वो कहने लगता अब आंख करों नम यार न न्याय करें इस कारण से कवि तू लिख जीवन के गम गीत भला लिखते किस के बिन हे प्रिय यार अभी मन है कम  Suraj Tiwari

53.किरीट सवैया जंगल( जंगल घूम रहें)

किरीट सवैया 211*8 जंगल जंगल धूम रहे हम कंकड़ कंकड़ चूम रहें जब राम भला करते खल का अब वार करे परलोक चले सब देव धरा पर है हम पूज रहे सब मंदिर ध्यान रहे कब जीवन युद्ध बिना प्रभु को पहचान नहीं मिलता जग में अब Suraj Tiwari