83.जलें है दिल मगर फिर भी चलें घर को

विदा ले यार जब से हम खले घर को
जुदा हो कर बहुत रोए भले घर को
कसम खा कर गए थे घर न आयेंगे
जले है दिल मगर फिर भी चले घर को

©️Suraj Tiwari

Comments

Popular posts from this blog

जिंदगी की सियासत

ग़ज़ल

ग़ज़ल