मुक्तक" हौसलों में छुपा दर्द

 हम कभी जब शहर में तुम्हे पढ़ रहे

गांव में बैठ जो तुम सृजन गढ़ रहे

ज्ञात हो स्कूल की वो किताबें सनम

हौसलों में छुपा दर्द पढ़ बढ़ रहे

Suraj Tiwari 

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