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शंभू की महिमा न्यारी

 विद्या कुंडलियां  विषय शंभू की महिमा न्यारी डम डम डमरू बज रहा ,तांडव करते नाथ देव चिंतित है क्या करे, क्रोधित भोलेनाथ परिभाषा तुम जान ,प्रेम भगवन से सिखा भूले बिसरे गीत, प्रेम की गाथा लिखा शिव शंकर का प्रेम,पार्वती जिस पर वारी मां गौरी के नाथ ,शंभू की महिमा न्यारी Suraj Tiwari

कृष्ण सदा लड़ते है वार

 विद्या _वीर छंद काव्यांश कृष्ण सदा लड़ते है वार बैठे बैठे सोच रहे क्या,जीवन की उपलब्धि आज  करके खाओ कहता है जग ,बिना कर्म मिले ना अनाज जीवन के रंग अनेकों है,हमने सीखा इतना यार  प्यार अधूरा राधा का भी,कृष्ण सदा लड़ते है वार Suraj Tiwari

बचपन के खेल

 विद्या सार छंद विषय बचपन के खेल खेल खिलौने बचपन वाले,याद कभी जब आते  उन बच्चों को देखूं अक्सर ,जो स्कूल नहीं जाते मात पिता की डाट सुने फिर,भी देखो मुस्काते  बाग, बगीचों ,खलिहानों में,गीत प्यार के गाते आज वहीं गांव गली छोड़े,सब कुछ जाते खोते  लड़का होना बहुत कठिन है, परदेश चले रोते  Suraj Tiwari

राघव राम पधारे

 विद्या __सार छंद काव्यांश _राघव राम पधारे *भक्ति भाव से प्रभु राहों में* , वह तो फूल बिछाती  ऋषि मुनि भी अब शीश छुकाते, वह प्रभु को समझाती  मेरे कुटिया को पावन कर ,झूठा तुम्हें खिलाती *बड़ी अभागन हूँ मैं* रघुवर, *शबरी* चरण दबाती *मंद *-* मंद प्रभु* मुस्काते *हैं* अब दुख नहीं जताते मां हनुमत से मिलना चाहूं,सारी कथा सुनाते  सब ऋषिमुक पर्वत पर  रहते ,बाली के डर से भागे राज पाठ को त्यागा सुग्रीव,जो है बड़े अभागे परलोक मुझे भी जाना है ,समय नहीं कहने को आज्ञा पा शबरी रघुवर से, चली धाम रहने को शबरी ने छुआ चरण राघव के  , पर प्रभु दुष्टों को मारे, हृदय सुखद इठलाता है घर, राघव राम पधारे  Suraj Tiwari

प्रधान रहा

 दुर्मिल सवैया छंद वह मानव क्या बतला सकता जिसके मन में अब घाव रहा वह रो कर जीवन को समझा,हसना जिसका स्वभाव रहा   सर पे पगड़ी फिर शोभित हो ,वह देख बना एक छांव रहा अब करते हम याद प्रधान तुम्हें तुमसे दिख सुंदर गांव रहा         Suraj Tiwari

सावन मन भावन

 सरसी छंद  💚🟢सावन मन भावन🟢💚  बाबू जी कहते है सावन, सबसे प्यारा मान हरियाली छाई चहूं ओर  धरती सजती है जान  सावन पावन है जल भर के, कावड़िया ले आय हर हर बम बम का नारा ही, शिव शंकर को भाय मेढक कूद रहे आस पास करते‌‍ टर टर पास बारिश होगी मूसलाधार मेढक पर विश्वास बारिश से जी डरता है अब, सुख से बीते रात अम्बर में बिजली तड़की है  प्रभु कम हो बरसात कागज की कस्ती वो मस्ती, करते कितना शाद मन झूम रहा खुशी से देख, आता बचपन याद प्यारा प्यारा जीवन जिनका करते हर दम गान  देख किसानों को जो जल में  गोद रहे है धान कवि भेज रहा सावन में खत, प्रिय से मिलने की चाह ताजमहल को देखा जब से, दिल से निकले वाह Suraj Tiwari

रक्षाबंधन का त्यौहार

 सरसी छंद  16.11यति पदांत 21 🔆रक्षाबंधन का त्यौहार 🔆 देख कलेंडर में इस दिन का,करते रहते वार  देख रक्षाबंधन है भाई,बहनों का त्यौहार  इस दिन सुबह सुबह होता है,मानो सबसे खास भाई बहना रहते देखो,अपने बैठे पास बहनों की थाली सजती है,बनता फिर है जाल मम्मी पापा देख रहे है,क्या होगा अब चाल हाथ बधी राखी पर खुश थे,चहरे पे मुस्कान बहना को दे क्या अब भाई,रक्षा करेगा मान डाला हाथ जेब से निकला,सौ का जब अब नोट  चिल्लाई बहना कहती है,भैया मन में खोट Suraj Tiwari