कृष्ण सदा लड़ते है वार
विद्या _वीर छंद
काव्यांश कृष्ण सदा लड़ते है वार
बैठे बैठे सोच रहे क्या,जीवन की उपलब्धि आज
करके खाओ कहता है जग ,बिना कर्म मिले ना अनाज
जीवन के रंग अनेकों है,हमने सीखा इतना यार
प्यार अधूरा राधा का भी,कृष्ण सदा लड़ते है वार
Suraj Tiwari
Comments
Post a Comment