बचपन के खेल

 विद्या सार छंद

विषय बचपन के खेल


खेल खिलौने बचपन वाले,याद कभी जब आते 

उन बच्चों को देखूं अक्सर ,जो स्कूल नहीं जाते


मात पिता की डाट सुने फिर,भी देखो मुस्काते 

बाग, बगीचों ,खलिहानों में,गीत प्यार के गाते


आज वहीं गांव गली छोड़े,सब कुछ जाते खोते 

लड़का होना बहुत कठिन है, परदेश चले रोते 


Suraj Tiwari

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