प्रधान रहा
दुर्मिल सवैया छंद
वह मानव क्या बतला सकता जिसके मन में अब घाव रहा
वह रो कर जीवन को समझा,हसना जिसका स्वभाव रहा
सर पे पगड़ी फिर शोभित हो ,वह देख बना एक छांव रहा
अब करते हम याद प्रधान तुम्हें तुमसे दिख सुंदर गांव रहा
Suraj Tiwari
दुर्मिल सवैया छंद
वह मानव क्या बतला सकता जिसके मन में अब घाव रहा
वह रो कर जीवन को समझा,हसना जिसका स्वभाव रहा
सर पे पगड़ी फिर शोभित हो ,वह देख बना एक छांव रहा
अब करते हम याद प्रधान तुम्हें तुमसे दिख सुंदर गांव रहा
Suraj Tiwari
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