52.काव्य दोष 3
5- दुष्क्रमत्व दोष जब कोई ऐसी बात कही जाती है जो लोक या शास्त्र के विरुद्ध हो तो दुष्क्रमत्व दोष होता है। उदाहरण - मुख मयंक को देखकर विकसा मानस कंज। कमल चंद्रमा को देखकर तो खिलता नहीं है इसलिए ये दोष है होना चाहिए था सूरज का मुख देखकर विकसा मानस कंज ये बात लोक विरुद्ध ही है न कि चंद्रमा को देखकर कमल खिला हां कुमुदिनी की बात होती तो सही था कुमुदिनी के पर्याय नलिनी, कैरव, चंद्रप्रिया, कमलिनी, छोटा कमल, अरविंदिनी, मृणालिनी, तामरसी, विधुप्रिया, तमरसी ये भी कुमुदिनी के पर्याय क्योंकि कुमुदिनी रात्रि में खिलती। 6- अपुष्टार्थत्व दोष:: जहाँ किसी ऐसी वस्तु का वर्णन हो जिसके न होने पर भी इच्छित अर्थ की प्राप्ति में बाधा न हो, तो पुष्टार्थत्व दोष होता है। उदाहरण - आये वैरी विपुल चढ़ के अब उठो सैनिकों तुम। वैरी विपुल न भी हों तब भी सैनिकों को उनका सामना करने को उठना ही होगा।यहाँ विपुल का प्रयोग अनावश्यक है। 7- व्रीडावाची दोष.... लज्जा या संकोच का भाव जगाने वाले शब्दों को व्रीडावाची शब्द कहते हैं। उदाहरण - घटाएं पुरानी मौन, बैठा सोचता हूँ उस समय कितना बड़ा मैं चूतिया था। ...