49. सवैया छंद 2

 अब विषय पर आते

सवैया छंद


यह एक वर्णिक छंद है। सवैया गणों पर आधारित होता है।इसमें चार चरण होते हैं। इसमें वर्णिक वृत्तों में 22 से 26 अक्षर के चरण होते हैं।सवैया छंद में चारों चरणों में सम तुकांतता होती है। गणों के विषय में आप पूर्व कक्षा में पढ़ चुके हैं।सवैया छंद के अनेक भेद हैं।


* मत्तगयंद सवैया*      


मत्तगयंद सवैया--भगण की सात आवृत्ति +गुरु+गुरु

अर्थात्..211 211 211 211 211 211 211 22.

कुल वर्ण - 23


उदाहरण:-


नाथ खड़ा कब से अब तो कर दो कुछ नाम सुनाम हमारे,

ये सच है बनते रहते बिन साधन के सब काम हमारे।

जीवन का हरते सब कष्ट कृपा करते  सुखधाम हमारे।

दीन दयाल, दयानिधि ये सुख कारक हैं  प्रभु राम हमारे।

ये इसका विधान है।


भागण सात मिला गुरु दो रच दो तुम मात्रगायंड मत्तगयंद सवैया।



                                     मनोज शुक्ल"मनुज"

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