48. तुकांत्ता
तुकांत ये शब्द सुना ही है।कौन तुक सही कौन गलत ये समझना आसान नहीं होता है।कविता लिखने के लिए इसे समझना बहुत ज़रूरी है।तुकांतता को वर्गों में बांटकर आपको समझाना चाहता हूँ।आप कहीं कहीं संवर्गीय उच्चारण से भी तुकांत मिला सकते हैं।
तुक मिलाने के लिए चरणों के अंतिम वर्ण की समानता आवश्यक होती है।
एक बात और ध्यान देने योग्य है कि यहां में ग़ज़ल के काफिया की बात नहीं कर रहा।हिंदी कविता के तुकांत की चर्चा है।
काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पंथ,
सब परिहरि रघुबीरहि भजहु भजहिं जेहि संत।।
परिहार मतलब दोष मुक्त बहुत विशेष बात नोट करें।
तुलसी बाबा के इस दोहे में गलत तुकांत का प्रयोग किया गया है।
क्योंकि वह पंथ और संत में अंतिम वर्ण समान नहीं है।
यही बात समझना जरूरी कि अंतिम वर्ण अनिवार्य रूप से समान हो
तुकांत को आप तीन वर्गों में बांट सकते यद्यपि ये तीनों सही हैं।
उत्तम तुकांतता
मध्यम तुकांतता
और अधम तुकांतता।
अधम से सब बचना चाहते आप भी कोशिश करो बचने की
आप भी कोशिश करो बचने की
बहुत विशेष बात नोट करें।
(यदि चरण के अंत में दो गुरु हों तो 5 मात्राएँ एक स्वर की होने पर तुक उत्तम होगा)
जैसेसुनि सिय बिनय प्रेम रस सानी,
भइ तब बिमल बारि वर बानी।
रस सानी
अ अ आ ई
1 1 2 2
वर बानी
अ अ आ ई
11 2 2
इसमें अंतिम6 मात्राएँ एक स्वर की।ये है श्रेष्ठ तुकांतता***
मध्यम तुकांत
चार मात्राओं के सम स्वर होने पर मध्यम तुकांतता मान लें
बैठेउ सभा खबरि असि पाई,
इ आ ई
सिंधु पार सेना सब आई।
अ आ ई
जब 4 से कम मात्रा के स्वर मिलें तो अधम तुकांतता
जैसे
ढपली
गली
अ ई
हिंदी में सामान्यतया 7 प्रकार के तुकांत की कविता दृष्टिगोचर होती है।
तुकांत पर आपको इतनी जानकारी अन्यत्र मुश्किल से मिलेगी
1--सर्वांत्य... इसमें छन्द के चारों चरणों की तुक मिलती
जैसे
सवैया छंद
घनाक्षरी
द्वितीय
सामंत...दूसरे और चौथे चरण के तुकांत मिलते।
जैसे
दोहा
रोला
तीसरा
विषमांत्य. .. विषम चरणों का तुकांत मिलता
जैसे पहला और तीसरा चरण
जैसे सोरठा
चौथा प्रकार...विषमान्त--समान्त्य....
यानी पहले तीसरे व दूसरे चौथे चरण का तुकांत मिले
पाँचवां
सम विष्मान्त तुकांत पहला चौथा दूसरा तीसरा इन चरणों का तुकांत मिलता
इस तरह की गीत रचनाएं देखने को मिलती हैं।
कहीं कहीं प्रबंध काव्यों में भी प्रयोग किया गया है।
गीत या मात्रिक छन्दों में गणात्मक मात्राएँ न होतीं
यानी मात्राओं का क्रम निर्धारित न होता
हो गया था संध्या का काल
सूर्य ने पश्चिम किया प्रयाण
दिशा देवी ने कर निर्माण
लाल रंग फेंका अरुण गुलाल
ये रामकुमार वर्मा जी की रचना
आप देखो 1 4
व 2 3 इन चरणों का तुकांत एक
षष्ठ
सम विष्मात्य
इसमें पहले दूसरे तथा तीसरे चौथे चरण की तुकांतता मिलती है
पहला दूसरा
तीसरा चौथा
चौपाई
आदरणीय, चौथे और पांचवे का कोई उदाहरण ?
ये मैने कल भी कहा था कि चौपाई में पहले और दूसरे चरण के तुकांत मिलते इसी प्रकार तीसरे और चौथे चरण के तुकांत मिलते हैं।
खेल खेल में सीख लो, कठिन सवैया छंद।
बढ़कर तुम सम्मान दो, बनो न अब मतिमंद।
इसमें पहले तीसरे
दूसरे चौथे चरण के तुकांत मिल रहे
ये चौथे प्रकार का उदाहरण हो गया
गुरुदेव त्रिभंगी छंद किस तुकांत वर्ग में आऐगा
उसमें तो चारों चरण के तुकांत मिलते है।साथ ही अंतर तुकांत ता भी होती
सातवां
जिन रचनाओं में पहले दूसरे चौथे चरण का तुकांत मिलता है व तीसरे चरण का तुकांत भिन्न होता है।
मुक्तक
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