50.काव्य दोष

 काव्य दोष--

1.श्रुतिकटुत्व दोष....जो शब्द कठोर वर्णों से बने होते हैं, सुनने में कटु लगते हैं।इनके प्रयोग से रचना में श्रुतिकटुत्व दोष होता है।जैसे---


देखत कछु कौतुक इतै,देखी नेकु विचारी।

कब की इकटक डटि रही,टटिया अँगुरिन डारि।।

                   बिहारी

स्पष्ट है कठोर वर्णों के प्रयोग से ये दोष उतपन्न होता।उदाहरण से स्पष्ट हुआ?????

जिसमें ट वर्ग के वर्णों का अधिक प्रयोग हो।



2.व्याकरण दोष...जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों के विरुद्ध प्रयुक्त होता है।जैसे--

मरम बचन जब सीता बोला।

यहाँ सीता के साथ पुल्लिंग क्रिया का प्रयोग है।



2.व्याकरण दोष...जब कोई शब्द व्याकरण के नियमों के विरुद्ध प्रयुक्त होता है।जैसे--

मरम बचन जब सीता बोला।

यहाँ सीता के साथ पुल्लिंग क्रिया का प्रयोग है।



3.अश्लीलत्व


जिस शब्द से अश्लीलता या फूहड़ता प्रकट हो उसके प्रयोग से यह दोष होता है।जैसे---


चोरत है पर उक्ति को जो कवि ह्वै स्वच्छन्द,

वे उत्सर्गरु वमन को, उपभोगत मतिमन्द।

जो कवि दूसरों की कविता को स्वछंद होकर चुराता है वो मूर्ख त्यागी हुई की हुई उल्टी का उपभोग करता है।

यहां उल्टी शब्द अजीब सी वितृष्णा उतपन्न करता है।इसलिए ये दोष है

इसी तरह अश्लील शब्दों के प्रयोग से भी ये दोष होता है।


4.अप्रतीतत्व दोष


जहाँ ऐसे शब्द का प्रयोग किया गया हो,जो किसी विशिष्ट अर्थ में प्रयुक्त होता हो या पारिभाषिक हो,परंतु साधारणतया प्रयोग न किया जाता हो,वहाँ  अप्रतीतत्व दोष होता है।


पास हैं सबूत सब मुजरिम लाइये जी ,

देर मत कीजिये मुकदमा चलाने में।

उम्र कैद दीजिए जी उम्र भर कैद रहे, 

उसको रखना कैद दिल कैदखाने में।

ऐसा प्रतीत होता है कोई मुजरिम लाया जाना है पर बात प्रेमी/प्रेमिका की है।इसलिए यहाँ अप्रतीतत्व दोष है।

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