47.पद किसे कहते है

 पद क्या होता है?

पद क्या होता :

किसी भी छान्दसिक रचना की एक पंक्ति को पद कहते हैं।

यानी रचना में जितनी पंक्तियां होंगी उतने ही पद होंगे।

जैसे दोहे में दो पद और चार चरण

उदाहरण से समझ जायेगे

दूध पिलाना साँप को और बुलाना काल,

बात "मनुज" हैं एक सी समझो ये तत्काल।


इसमें दो पंक्तियाँ


इसका अर्थ ये हुआ दोहे में दो पद होते।

एक पद में एक चरण या अधिक चरण भी हो सकते


जैसे दोहे में चार चरण हैं

पहला


दूध पिलाना साँप को,


दूसरा


 और बुलाना काल,


तीसरा


बात "मनुज" हैं एक सी, 


चौथा

समझो ये तत्काल।


उदाहरण नं 2


अधरों पर है बाँसुरी,

मोर मुकुट है शीश।


निरख राधिके को रहे,

श्याम द्वारकाधीश।।


13/11 दोहा

चार चरण दो पद

जीवन की नैया, आप खिवैया, दूर न मुझसे, अब जाना।

तुमको समझाना, यही बताना,तुम ही पूजा ,भगवाना।

सब अच्छा ही है, सुंदर भी है , जो कुछ मन में, है ठाना।

तुमसे ही सुख है, डरता दुख है, यह सच हमने ,अनुमाना। 

                                             मनोज शुक्ल"मनुज"


त्रिभंगी छंद -


जीवन की नैया,


 आप खिवैया,

  दूर न मुझसे, 


अब जाना।


ये चार चरण एक पद में


10,8,8,6 मात्रा पर

ये त्रिभंगी छंद है

इसमें चार पंक्ति हैं यानी चार पद

रहिमन रहिला की भली, जो परसै चित लाइ।

इसमें कितने चरण और कितने पद?

प्रेम के पंथ में एक योगी चला,

प्रिय की मनुहार करने वियोगी चला।


इसमें कितने पद और कितने चरण।

दोनों पंक्ति हैं दोनों का तुकांत मिल रहा

यानी दो पंक्ति हैं

एक नहीं

और बीच में कोई अर्धविराम नहीं यानी हर पंक्ति एक ही चरण

इस प्रकार ये दो पद दो चरण हैं

सामान्य पहचान है कि यदि पंक्ति के मध्य अर्ध विराम है तो वहां तक एक चरण


प्रश्न प्रेम के पंथ में एक योगी चला,

प्रिय की मनुहार करने वियोगी चला।

आदरणीय इसमें प्रथम पद के बाद अर्धविराम क्यों लगा है??

उत्तर आपकी बात तो सही है किन्तु आम तौर पर तुकांत हर पंक्ति का मिलता


यदि आप दोहे की पहली पंक्ति में । लगाते हैं तो नीचे वाली में ।। लगाने होते।

चरण की मोटी परिभाषा यही है कि पढ़ते समय जहां जहां विराम लेना पड़े।

और हर छंद के विधान में चरणों की संख्या इंगित होती है।

इसलिए कोई संदेह की स्थिति ही नहीं बचती

जैसे आप दोहा लिखते तो निर्धारित है कि दोहा चार चरण का ही होता

गीत में कोई नियम नहीं हैं सिवाय इसके कि लय में हो

गीत हर छंद पर लिखा जा सकता

जिस छंद में होगा उसी के अनुसार विराम अल्पविराम व अन्य नियम रहेंगे।

चरण हर छंद में पहले से ही इंगित होते।

आदरणीय, एक बात पूछनी थी, चौपाई छंद को कहते हैं 16 मात्रा प्रति चरण,कुल चार चरण, दो-दो चरण सम तुकांत। इसको पद क्यों नहीं बोलते हैं??

चौपाई छंद में दो पद होते 

आप बोलो

पद आम तौर पर कहीं चर्चा में न आते

चरणों की ही बात होती

लंबे पदों में यदि यति न हो तो पढ़ने में दिक्कत होगी

इसी कारण से छन्द बद्ध रचनाओं में पद दो या दो से अधिक भागों में बंटे रहते हैं

यानी यति पद को चरणों में विभक्त करती ह

किसी भी छन्द में यति केवल प्रवाह में अवरोध का परिचायक ही नहीं है।ये चरणों की संख्या का निर्धारण भी करती हैं।

जीवन की नैया, आप खिवैया, दूर न मुझसे, अब जाना।

तुमको समझाना, यही बताना, तुम ही पूजा ,भगवाना।

सब अच्छा ही है, सुंदर भी है , जो कुछ मन में, है ठाना।

तुमसे ही सुख है, डरता दुख है, यह सच हमने ,अनुमाना। 

                                             


 आप बताएं इसमें कितने पद , और हर पद में कितनी यति. 


पहला पद

जीवन की नैया, आप खिवैया, दूर न मुझसे, अब जाना।


दूसरा पद

तुमको समझाना, यही बताना, तुम ही पूजा ,भगवाना।



तीसरा पद

सब अच्छा ही है, सुंदर भी है , जो कुछ मन में, है ठाना।


चतुर्थ पद


तुमसे ही सुख है, डरता दुख है, यह सच हमने ,अनुमाना। 

                                             पहली यति

जीवन की नैया, 


दूसरी यति


आप खिवैया,  


तीसरी यति

दूर न मुझसे, 


तुम जाना।

चतुर्थ यति

गति


सामान्य तौर पर छान्दसिक रचनाओं के गायन में जो प्रवाह होता है उसे गति कहते हैं।

जिन रचनाओं में गण निर्धारित हैं उनमें स्वतः प्रवाह होता है।

किन्तु जो छन्द गणों पर आधारित नहीं उनमें लय साधनी होती है।

आज पद चरण यति गति पर बात हुई।

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