है बंदगी ,ये जिंदगी हम थे जलें ,जिस पथ चलें कैसा डगर,हमको ख़बर जो बट रहे, वे कट रहे क्या हम नहीं, हिन्दू सही क्या मान गर,सामान्य गर बोलो सखा,क्या है रखा बेकार ये,सरकार ये कैसा बजट,ये है गजट अब साफ कर,मत माफ कर सब वार कर,मन मार कर अब भाजपा , लगता नपा आए शरण,तेरे चरण दे प्राण सब,हे राम अब अब मान दो ,बस ज्ञान दो प्रभु तार दो ,बस प्यार दो सूरज तिवारी