ग़ज़ल
सभी की नैय्या वो ही देखो खेता है
खुदा बिन मांगे सब कुछ यार देता है
भरा था मुफलिसी में पेट बच्चे ने
उसे अब तो कोई भी गोद लेता हैं
किया कुर्बान सब कुछ ही जहां के वास्ते
बगावत कर उभरता था वो नेता हैं
सूरज तिवारी
सभी की नैय्या वो ही देखो खेता है
खुदा बिन मांगे सब कुछ यार देता है
भरा था मुफलिसी में पेट बच्चे ने
उसे अब तो कोई भी गोद लेता हैं
किया कुर्बान सब कुछ ही जहां के वास्ते
बगावत कर उभरता था वो नेता हैं
सूरज तिवारी
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