दोहा मुक्तक

सखा विरह कैसे सहा,तुम जानो सब नाथ

पड़ा चरण हूं आपके ,मुझपे रखना हाथ 

भक्ति भाव मेरा समझ,बोलो कृपा निधान 

सुदामा कृष्ण द्वार पे , माँग रहा है साथ


सूरज तिवारी

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