53.किरीट सवैया जंगल( जंगल घूम रहें)
किरीट सवैया
211*8
जंगल जंगल धूम रहे हम कंकड़ कंकड़ चूम रहें जब
राम भला करते खल का अब वार करे परलोक चले सब
देव धरा पर है हम पूज रहे सब मंदिर ध्यान रहे कब
जीवन युद्ध बिना प्रभु को पहचान नहीं मिलता जग में अब
Suraj Tiwari
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