ग़ज़ल

 जुगनू प्रश्न उठाते थे

झूठी कसमें खाते थे


सूरज है नादान बड़ा 

तुम जग को बतलाते थे 


ग़म के काले साये में 

यू मुझे ग्रहण लगाते थे


चाँद सितारों की कसमें 

प्रेमी नहीं निभाते थे 


सूरज पर प्रश्न उठाकर 

घर को रोशन करते थे 


सूरज तिवारी

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