ग़ज़ल

  


चलें उल्टी हवा हर्षू तो पौधे टूट जाते है

हो खाली जेब गर इंसा की रिश्ते टूट जाते है 


रहे गर हौसले बुलंद तो दुश्मन खौफ खाते है

दिखा दे हौसला चिड़िया तो पिंजरे टूट जाते है


मोहब्बत से मना लो आप अपने खास लोगों को

उदासी देख अब लम्हें सुहाने टूट जाते है


पकड़ कर अंगुली जिसने हमें चलना सिखाया था

बुढ़ापे में रखें गर हाथ कांधे टूट जाते है


भरोसा जिन पे होता वे ही अक्सर रूठ जाते है 

खुदा क्यों यूं खुली आंखों के सपने टूट जाते है


सूरज तिवारी

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