Gazal

 कुछ लोग जी रहे है सहारे बगैर भी

 हमने कमा लिया है इशारे बगैर भी

 

तस्वीर एक जिसमें मैं शामिल नहीं कभी

सम्मान दे रहे वो तुम्हारे बगैर भी 


प्रिए दिल निकाल हाथ पे रख दे फटाक से

 क्या चाहते हैं और हमारे बगैर भी


संघर्ष के घड़ी में अकेले थे ऐ खुदा 

कुछ लोग हार जाते है हारे बगैर भी


घुटनों में अब पड़े यू गुलामों की ही तरह 

उसने लिया गुलाब न पुकारे बगैर भी 


सूरज तिवारी

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