ग़ज़ल
हुई जवानी ख़त्म मिरी दिल लगाते हुए
मगर वो साथ दे हम नाचे मुस्कुराते हुए
हमारे पास आ कोई पिता का दर्द समझे
विदाई पे तेरे बेटी विरह सुनाते हुए
परिंदे छोड़ कहां जाएगा तू आशियाना
शिकारी पेड़ को यूंही देख जलाते हुए
नसीबो में जो लिखा है मिलेगा वो प्यारे
किसी की बात का मजाक क्यों उड़ाते हुए
फिजूल शौख न पालों जहां में अब सूरज
अधूरे प्यार को क्यों तुम सनम जलाते हुए
सूरज तिवारी
Comments
Post a Comment