मुक्तक

कभी रिश्ता निभाते है कभी फिर दूर होते है

यहां सपने सभी पल भर में चकनाचूर होते है

परीक्षा ले रही दुनियां हमारी हर घड़ी सच है 

खुदा हम द्वार तेरे यूं खड़े मजबूर होते है


सूरज तिवारी

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