ग़ज़ल

 ग़ज़ल


दिया जो श्राप मां ने जग गया है 

अधूरे कृष्ण को अब लग गया है 


सुदामा मित्र से मिलने कन्हैया

भवन से ग्राम नंगे पग गया है


जिसे दुनिया समझती देवता है

वही छलिया जगत को ठग गया है   


सूरज तिवारी

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