ग़ज़ल
गए मोहन कमी सबको खली है
अकेले राह बैठी बावली है
न पुरुषार्थ कभी आंका मुरारी
जगत में बावली राधा जली है
किया किसका नहीं उद्धार राधे
जहां में प्रेम की सीधी गली है
बजाते चैन की बंसी कन्हैया
कभी ये बावली पीछे चली है
न छोड़ो बीच राहों में कन्हैया
किसी के बाग की नाजुक कली है
- सूरज तिवारी
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