ग़ज़ल
हमारे पांव के जूते किधर है
बुराई आज वो करते खबर है
चिरागों से जलें है हाथ मेरे
हवा जिस और का वो उधर है
मिलेगा वोट किसको जानता हूं
हमारी चाहते सब बेअसर है
बदलते वक्त को क्या देखते हम
छुपाया यार ने खंजर नजर है
भला करना जमाने का गलत है
खड़े उस राह पर बागी जिधर है
सूरज तिवारी
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