अभिमन्यु वध

अभिमन्यु कीड़ा स्थल नहीं यह मृत्यु निकट जब आया है । 
दुर्योधन कहता रूक  बालक काल तेरा आया ।।

द्रौण, कृपा, भीष्म, कर्ण शकुनि   सब जाने हैं। 
निहत्थे अभिमन्यु पर सारे तलवारे ताने है ।।

धिक्कार है उन योद्धाओं पर जो षड्यंत्रों से जीते हैं । 
उन्हें तरस ना आया बिल्कुल वह संबंधों से रीते है।।

सात-सात योद्धाओं ने मिलकर अभिमन्यु को मारा है । 
अर्जुन जान पुत्रघात जयद्रथ वध ऊच्चारा है।।

 सांझ का भ्रम जयद्रथ जब  निकल सूर्य आया।
प्रण पूर्ण किया अर्जुन ने गांडीव लहराया।।

प्रण पूर्ण किया अर्जुन ने जयद्रथ को मारा है । 
यह रचा खेल श्री कृष्ण ने दुखियों का जो सहारा है।। 

धृतराष्ट्र के पुत्र मोह ने यह संग्राम रचाया है। 
केशव के समझाने पर भी जब वह समझन पाया है।। 

पुत्र मोह नहीं होता तो चीरहरण नहीं होता। 
भीष्म पितामह जैसा योध्दा तीरों पर नहीं होता।।


Suraj Tiwari 

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