बस मांगू अधिकार

 सरसी छंद 

16.11 

पदांत 21


शाम सबेरे जब जी करता,करते दिल की बात 

मुलाकात कर कहना था,सोच रही क्या जात


हम तेरे अपने है देखो ,दिल की नाजुक डोर

मिलना आसान कहां वर पक्ष ,जब प्रभु देते जोर


घर वाले थक जाएंगे जब,तब आओगे पास 

दीपक ले ढूंढोगे सूरज,मिले तभी विश्वास


जीवन पथ पर कठिनाई है,हाथ थाम लो यार

प्यार तुम्हें भी हो जाएगा,मिले तुम्हे उपहार


भगवन से करता प्रार्थना ,विनती बारम्बार

तुम मेरी हो जाओ इतना,बस मांगू अधिकार


Suraj Tiwari

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