कितना प्यारा गांव हमारा

 1.हरे भरे सुंदर वन उपवन ,से सजा हुआ प्यारा गाँव।

प्यारे प्यारे लोग यहां के, बैठे पीपल के हम छांव।।


2.गांव गली घर छूटा जैसे, खुशियों से देख हुए दूर।

घर का चूल्हा मां की रोटी,खाने को अब है मजबूर।।


3.सावन की बूंदे धरती पर,गिर कहती अक्सर यह बात।

ना अलग करो मैं पानी हूं ,मेरी भी  है अब औकात।।


4.बने मुसाफिर बन छोड़ चलें,देखो अपने अपने राम। 

वनवास बिता करते है अब, सपनो के लिए यहां काम।।


5.जीवन के रंग अनेकों है ,हमने सीखा इतना ज्ञान ।

जीवन जीया कम लेकिन था,इतना चारों तरफा शान।।


6.लोग हमें देते है ताने,करते कानाफूसी आज ।

जब अखबारों में छपते थे, बहुतों के आता था काज।।


7.जीवन हार नहीं मानेंगे,मेरी बातों को भी मान। 

गिर गिर खुद खड़ा हुआ जैसे ,मुझमें दीपक को तू जान।। 

Suraj Tiwari

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