खत में लिखता हूं सब राज


आल्हा छंद 16.15यति.पदांत 21

छोड़ कहां जा सकता हूं प्रिय, क्यों हो मुझसे तुम नाराज

प्यार अधूरा कब जी सकता,खत में लिखता हूं सब राज


याद कभी तुमको जब कर के, लिखता रहता खत मै यार

सोच समझ कर घर पर आता,करना चाह रहा इजहार


बारिश की बूंदों में करते ,यारा तुमको दिल से याद

आंखों में अब जल भर आया ,मुश्किल से दिल करता शाद


जज्बात लिखूं मै तो दिल की,प्यार करूं क्यों तोडूं फूल 

मुफलिस की अब हवा चली है,आंखों में गड़ते अब शूल


राहत कब मिलता है दिल को ,करते हम फूलों से प्यार

नाजुक कलियों में कांटे फिर,भी गुत्था मोती का हार 


जब भवरों ने कहना चाहा,फूलों से अब दिल की बात 

समझाया कांटों ने भवरे ,करते सीधा दिल पर घात


Suraj Tiwari

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