जिंदगी की सियासत यहां राजा के दरबारी बहुत है मरें क्यों जिंदगी प्यारी बहुत है जहां में साथ कोई भी न देगा यहां पर काला बाजारी बहुत है कमाते फिर रहे हो चंद रुपए कभी हँसते थे व्यापारी बहुत है दगा देती सभी को जिंदगी है सनम मुझको भी बीमारी बहुत है यहां तो जंग के मैदान में भी अभी देखो वफादारी बहुत है सूरज तिवारी
चलें उल्टी हवा हर्षू तो पौधे टूट जाते है हो खाली जेब गर इंसा की रिश्ते टूट जाते है रहे गर हौसले बुलंद तो दुश्मन खौफ खाते है दिखा दे हौसला चिड़िया तो पिंजरे टूट जाते है मोहब्बत से मना लो आप अपने खास लोगों को उदासी देख अब लम्हें सुहाने टूट जाते है पकड़ कर अंगुली जिसने हमें चलना सिखाया था बुढ़ापे में रखें गर हाथ कांधे टूट जाते है भरोसा जिन पे होता वे ही अक्सर रूठ जाते है खुदा क्यों यूं खुली आंखों के सपने टूट जाते है सूरज तिवारी
दिल में अब आरजू जगाया कर ग़म मिलें फिर भी मुस्कुराया कर लाल इतनी हुई है क्यों ऑंखें अश्क़ चश्मे से तू छिपाया कर कैद कर प्रेमियों के जोड़े को ऐ सितमगर सितम न ढाया कर भेद देने से जल गई लंका भेदियों से बसर बचाया कर देन मॉं बाप की विरासत है बेच कर दाग मत लगाया कर सूरज तिवारी
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