12निष्कपट प्रेम के पीर में सोचती

 सब्र के बांध पर धीर में सोचती 

जानकी राम के नीर में सोचती

राम की फट धरा जब रही अश्रु से

निष्कपट प्रेम के पीर में सोचती 

©️suraj tiwari✍️

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