14.गीत विरह लिखने बैठे है
दिल के सब किस्से कलमों से हम लिखने बैठे हैं
स्याह मिरा नाम उसीका मोहब्बत अब लिखने बैठे हैं
शिव शंकर विष पान किए हैं मैं प्रेम समझ ना पाऊं
राधा मीरा प्रेम अधूरा गीत विरह लिखने बैठे हैं
©️Suraj tiwari
दिल के सब किस्से कलमों से हम लिखने बैठे हैं
स्याह मिरा नाम उसीका मोहब्बत अब लिखने बैठे हैं
शिव शंकर विष पान किए हैं मैं प्रेम समझ ना पाऊं
राधा मीरा प्रेम अधूरा गीत विरह लिखने बैठे हैं
©️Suraj tiwari
Comments
Post a Comment