4लौट आओ लखन दोष लग रहें

 राम  के  नेत्र के  अश्रु भी  बह  रहें 

लौट आओ लखन दोष भी सह रहें

आस का दीप बुझ सा रहा रात में

राम लक्ष्मण विमुख हो गए कह रहें

 ©️suraj tiwari✍️

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