23.मुहब्बत की कहानी हम सुनाते थे
मुहब्बत की कहानी हम सुनाते थे
जुदाई में चिता खुद की सजाते थे
उसी के इश्क़ में साईकिल चलाते थे
गली में हो खड़े घंटी बजाते थे
पलट कर देखती थी यार वो भी
उसी की थी रजा जो गीत गाते थे
उसी की चाहतों पर जंग जारी था
सनम के चौखटों पर हाथ जोड़े थे
जमाने से बगावत दिल्लगी में कर
सनम ही हो खुदा ये भ्रम तोड़े थे
©️Suraj Tiwari
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