(१)मेरा गांव
मेरा गाँव
खुशियां अभी भी बसती है जहाँ
अभी भी हैं पीपल की छाँव
कितने सुंदर लोग यहाँ के
कितने सुंदर बोल यहाँ के
नहीं किसी से बैर यहाँ अब
सभी भाई चारा निभाते हैं यहाँ।
सुबह चिड़ियां चहकती आँगन में
किसान खुशहाल मिलें खलिहानों में
शिक्षा स्वास्थ्य अस्पताल हैं
पगडंडी नहीं अब रास्ते बेहतर है
अब गाँवों में सब खुशहाल हैं।
स्वच्छ नदी का निर्मल जल
सभ्यता संस्कृति को सींचती घर घर
नारियां भी जहाँ अब शिक्षित हैं
बदल रहा देखो मेरा गाँव।
©️Suraj Tiwari
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