16सरकार उनकी है जिनके हाथ में नोटों कि बोरी है

 रस्ता रस्ता खालीपन हैं मंज़िल मंज़िल दूरी है। 

पैदल चलने में हमसे पूछो कितनी मजबूरी है। 

इंसान अकेला कब तक लडे़ किस्मत के बाजार में। 

सरकार उन्हीं की जिनके हाथ में नोटों की बोरी हैं।

©️Suraj Tiwari


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